Hindi chapter 2 part 1,shatranj ke khiladi part 1शतरंज के खिलाड़ी पार्ट 1 हिंदी पाठ 2 प्रेमचंद , मुंशी प्रेमचंद imp facts and points
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शतरंज के खिलाड़ी( मुंशी प्रेमचन्द) पार्ट 1
शतरंज के खिलाड़ी( मुंशी प्रेमचन्द) पार्ट 1
Imp notes and most important points
शतरंज के खिलाड़ी( कहानी) के लेखक: मुंशी प्रेमचंद
आईए जानते हैं उनके बारे में बहुत ही महत्वपूर्ण पॉइंट्स जो की परीक्षा में निश्चित रूप से पूछे जाएंगे और कंपटीशन की दृष्टि से बहुत अच्छे हैं
- मुंशी प्रेमचंद.............
- मुंशी प्रेमचंद , प्रेमचंद है ,प्रेमचंद्र नहीं
- असली नाम: धनपत राय
- उपनाम : नवाब
- पिता का नाम : अजायब राय
- माता का नाम : आनंदी देवी था
- उनके दादा: गुरु सहाय राय
- जन्म : 31 जुलाई 1880 लमही गांव ,बनारस जिला ,उत्तर प्रदेश
- मां का मायका (ननिहाल): करौनी गांव
- प्रेमचंद का उपनाम: नवाब (राजकुमार )
- 8 वर्ष उम्र में मां का निधन
- पालन पोषण दादी ने किया
- दादी की भी शीघ्र मृत्यु
- बड़ी बहन की शादी हो गई
- पिता काम में व्यस्त
- जिस कारण से प्रेमचंद अकेला महसूस करते थे
- सौतेली मां से स्नेह मिला
- 15 वर्ष में नवी कक्षा में पहली शादी
- पत्नी दुखी होकर मायके चली गई
- 26 वर्ष में, बाल विधवा शिवरानी देवी से प्रेम विवाह
- जिससे तीन संताने हुई: अमृत राय ,श्रीपत राय ,कमला देवी
- मैट्रिक की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण
- कम अंक के कारण कहीं एडमिशन नहीं मिला
- बनारस के वकील के बेटे को ₹5 प्रति माह से कोचिंग पढ़ाया कई सरकारी स्कूलों में एवं प्राइवेट स्कूलों में अध्यापन कार्य किया
- प्रतापगढ़ में मुंशी दया नारायण से मिले जो उर्दू पत्रिका जमाना के संपादक थे
- उनके साथ मिलकर जमाना पत्रिका में कई लेख एवं कहानियां प्रकाशित की
- पहले वो रचनाये नवाब राय के नाम से करते थे
- अंग्रेजो ने उनकी प्रथम कहानी संग्रह 'सोजे वतन ' को जप्त कर लिया
- उसके बाद से वो प्रेमचंद के नाम से लिखने लगे
- पहला उपन्यास : असरार ए माआ बिद (देवस्थान का रहस्य) जिसमे उन्होंने पुजारियों द्वारा गरीब महिलों के शोषण को रेखांकित किया
- पहला हिंदी उपन्यास: सेवा सदन , (मूल रूप उर्दू में ' बाजरे हुस्न')
- सबसे प्रसिद्ध उपन्यास : गोदान
- अंतिम पूर्ण उपन्यास : गोदान
- अंतिम अपूर्ण उपन्यास: मंगलसूत्र (जिसे उनके पुत्र अमृत राय ने पूरा किया)
- अन्य उपन्यास: कर्मभूमि ,रंगभूमि ,कायाकल्प ,निर्मला ,गबन गोदान ,मंगलसूत्र आदि
- सबसे छोटा उपन्यास: निर्मला
- कुल मिलाकर 15 उपन्यास
- पहली कहानी: अनमोल रतन (1907)
- दूसरी कहानी :सौत (1910)
- तीसरी कहानी : बड़े घर की बेटी (1915)
- अंतिम :कहानी कफन
- प्रमुख कहानी : ईदगाह, शतरंज के खिलाड़ी ,पंच परमेश्वर ,दो बैलों की कथा, आत्माराम ,परीक्षा, नमक का दरोगा आदि
- अन्य कहानियां: ठाकुर का कुआ, पूस की रात, त्रिया चरित्र, आल्हा, दूध का दाम, सवा सेर गेहूं,
- महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में सरकारी नौकरी छोड़ी
- मुंशी प्रेमचंद उपन्यास सम्राट कहे जाते है
- महाराष्ट्र में प्रेमचंद के सम्मान में प्रेमचंद पुरस्कार दिया जाता है
- साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 2005 में प्रेमचंद फैलोशिप की स्थापना की गई जो की सार्क देशों के प्रतिष्ठित लोगों को संस्कृति के क्षेत्र में दिया जाता है
- नाटक: संग्राम, कर्बला ,प्रेम की बेदी
- मुंशी प्रेमचंद ने कुल 14 पूर्ण उपन्यास एक अपूर्ण उपन्यास
- 7 बाल पुस्तके, 300 से अधिक कहानी ,10 अनुवाद और 3 नाटक लिखे हैं
- प्रथम प्रकाशित कहानी संग्रह : सप्त सरोज (सात प्रमुख कहानियों का संग्रह)
- मानसरोवर जो की मुंशी प्रेमचंद की 200 से भी अधिक मशहूर कहानियां का संग्रह है कुल आठ करो में विभाजित है
- ' प्रेमचंद के फटे जूते' हरिशंकर परसाई का व्यंग्य संग्रह है '
- ' प्रेमचंद घर में ' शिवरानी देवी द्वारा प्रेमचंद के ऊपर लिखी गई जीवनी
- ' कलम का सिपाही ' अमृत राय द्वारा मुंशी प्रेमचंद पर लिखी गई जीवनी
- 39 वर्ष की उम्र में बी एड की डिग्री प्राप्त की
- मजदूर (द लेबर ) फिल्म की पटकथा लिखी जिसके निर्देशक मोहन भवानी थे
- लेखक संघ के पहले अध्यक्ष रहे
- 8 अक्टूबर 1936 को 56 वर्ष की उम्र में निधन।
- मुंशी प्रेमचंद एक कथाकार ,उपन्यासकार ,लघु कथाकार, नाटककार , लेखक ,अनुवादक और विचारक थे।Munshi Premchand was a storywriter, novelist, short story writer, playwright, writer, translator and philosopher .
- किंतु वह एक कथाकार के रूप में मशहूर हैं और उपन्यास सम्राट कहलाते हैं।
- मुंशी प्रेमचंद ने ' जागरण' नामक पत्रिका एवं ' हंस ' नामक मासिक साहित्यिक पत्रिका का संपादन किया
- मुंशी प्रेमचंद जी ने यथार्थवादी एवं आदर्शवादी कहानियों को लिखा है
- उन्होंने हमें नए प्रकार की ललित कहानियां प्रदान की जो कि आम जनता एवं गरीब जन जीवन से संबंधित जीती कहानियां है।
- उन्होंने समाज की कुप्रथा और रूढ़ियों, भेदभाव,शोषण ,गरीबों पर अत्याचार आदि प्रदर्शित किया है।
- मुंशी प्रेमचंद ने उपन्यास की परिभाषा इस प्रकार दी:
- मैं उपन्यास को मानव जीवन का चित्र मात्र समझता हूं , मानव जीवन के प्रत्येक पहलुओं पर प्रकाश डालना एवं उसके रहस्यों को खोजना ही उपन्यास का मूल तत्व है।
प्रेमचंद के सम्मान में पोस्टकार्ड में उनकी फोटो भी लगाई गई।

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