Yoga chapter 4 : सूर्य नमस्कार (last chapter of 1st unit) , first year foundation course for every body
Now we are presenting the 4th chapter of our compulsory foundation course " Yoga and meditation"
So lets get started without any delay
Introduction
योग की पहली इकाई का नाम " योग एवं योग अभ्यास का परिचय " है जिसका चौथा एवं अंतिम पाठ "सूर्य नमस्कार" है इस पाठ में सूर्य नमस्कार उसके 12 आसन उनका महत्व एवं उनके मंत्रों के बारे में वर्णन किया गया है।संसार की ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत एवं प्रत्येक वस्तु का मूल आधार सूर्य ही है।
भारतीय ऋषियों ने सूर्य नमस्कार की ऐसी प्रणाली विकसित की है जिसमें व्यायाम व मंत्र के साथ-साथ सूर्य उपासना का भी समन्वय में हो जाता है। विज्ञान भी सूर्य नमस्कार से मिलने वाले लाभों को मानता है।
The name of the first unit of Yoga is "Introduction to Yoga and Yogic Practice" whose fourth and last lesson is "Surya Namaskar".In this lesson, Surya Namaskar, its 12 asanas, their importance and their mantras have been described.
The Sun is the biggest source of energy in the world and the basic foundation of everything. Indian sages have developed a system of Surya Namaskar in which sun worship is combined with exercise and mantra. Science also recognizes the benefits of Surya Namaskar.
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Summary and out look
सूर्य नमस्कार में कुल 12 आसन है। सूर्य नमस्कार का अर्थ सूर्य को 12 तरीकों से नमस्कार करना है। सूर्य नमस्कार का अभ्यास सूर्य की रोशनी में सूर्य के उदय होने के एक-दो घंटे के अंदर करना चाहिए। सूर्य नमस्कार अभ्यास अकेला ही साधक को संपूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने का समर्थ रखता है। अर्थात सूर्य नमस्कार करने के पश्चात किसी और योगासन को करने की आवश्यकता नहीं होती।
सूर्य नमस्कार में 12 आसन एवं 12 मंत्र हैं जिनमें से प्रत्येक का अर्थ है सूर्य को मेरा नमस्कार।
There are total 12 steps in Surya Namaskar. Surya Namaskar means saluting the Sun in 12 ways. Surya Namaskar should be practiced in sunlight within one to two hours of sunrise.
Surya Namaskar practice alone enables the practitioner to get the benefits of complete yoga exercise. i.e. after doing Surya Namaskar , there is no need to do any other yoga asana.
There are 12 asanas and 12 mantras in Surya Namaskar, each of which means my salutation to the Sun.
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सूर्य नमस्कार के दो क्रम ( चरण) होते हैं। पहला दाएं पैर के साथ और दूसरा बाएं पैर के साथ। आदर्शतः हमको कम से कम 12 सूर्य नमस्कार प्रतिदिन करने चाहिए किंतु अपने समर्थ के अनुसार जितना भी सहज तरीके से किया जा सके उतना भी कर सकते हैं।
There are two stages of Surya Namaskar. The first with the right foot and the second with the left foot. Ideally, we should do at least 12 Surya Namaskar every day, but we can do them as much as we can easily.
सूर्य नमस्कार के 12 आसन
1) प्रणामासन Pranamasana : यह सूर्य नमस्कार का प्रथम अभ्यास है जिसमें सामान्य मुद्रा में खड़े होकर दोनों हाथों को जोड़कर सूर्य को प्रणाम किया जाता है एवं ओम मित्राय नमः मंत्र का उच्चारण Pronunciation करते हुए आज्ञा चक्र पर ध्यान केंद्रित focus किया जाता है।
मित्र: सूर्य सभी हित करने वाले अर्थात एक सच्चे मित्र है
2) हस्त उत्तानासन: श्वास भरते हुए हाथों को पीछे की ओर यथा संभव as possible झुकना , दोनो हाथ कान से सटे , गर्दन Neck पीछे की ओर झुकी , ध्यान विशुद्धि चक्र पर, ॐ रवये नमः मंत्र का उच्चारण ।
रवि: प्रकाशमय luminous
3) उत्तानासन/ पाद हस्तासन: पैर सीधे , सिर घुटनों से लगा , श्वास बाहर , ध्यान नाभि Navel के पीछे मणिपूरक चक्र पर, ॐ सूर्याय नमः।
सूर्य के रथ Chariot के सात घोड़े = परम चेतना से निकलने वाले सात किरणों ( भू, भुवः, स्वः, तपः, जनः, मः, सत्यम् , )
4) दक्षिण अश्व संचालन आसन: ध्यान स्वाधिष्ठान अथवा विशुद्ध चक्र, ॐ भानवे नमः
भानु : गुरु
5) चतुरंग दंडासन: ॐ खगाय नमः, सहस्रार चक्र
खग: समय का ज्ञान देने वाले
6) अष्टांग आसन/ अष्टांग दंडवत प्रणाम : इस आसन में शरीर के आठ अंग ( 2 पैर के पंजे , 2 घुटने , 2 हथेलियां , सीना एवम दाढ़ी ) तल से स्पर्श करते हैं।
ध्यान: अनाहत चक्र, ॐ पूष्णे नमः
पूष्ण= पोषण करने वाला (पिता)
7) भुजंगासन : भुजंग = नाग, साप । मंत्र : ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ध्यान : मूलाधार चक्र
8) अधोमुक्त श्वानासन/ पर्वतासन : नितम्बो को अधिक से अधिक ऊपर उठाने का प्रयास , ठोड़ी को कंठ से लगाए ,
ध्यान : सहस्रार चक्र पर , ओम मरीचये नमः
मरीचिका mirage : मृग मरीचिका जैसे हिरण रेगिस्तान में सूर्य की रोशनी के कारण प्रतीत होने वाले जल को देखकर भागता रहता है उसी प्रकार हम भी जीवन भर अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए सुख की प्राप्ति में इधर-उधर दौड़ते रहते हैं।
9) वाम अश्व संचालन आसन: ॐ आदित्याय नमः, ध्यान विशुद्धि चक्र
आदित्य : आदि , प्रारंभ
सूर्य इस जगत के आदि है, आदि का कारण है, आदिकाल से हैं
10) उत्तानासन/ पाद हस्तासन: ॐ अर्काय नमः, नाभि के पीछे मणिपुरक चक्र
अर्क: ऊर्जा
11)हस्त उत्तानासन: ॐ सवित्रे नमः, विशुद्धि चक्र
12) प्रणामासन : ॐ भास्कराय नमः, आज्ञा चक्र
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सूर्य नमस्कार के लाभ
शारीरिक बल में वृद्धि increase in physical strength
मानसिक उन्नति mental progress
स्मरण शक्ति तीव्र sharp memory
रक्त संचरण शुद्ध blood circulation purifier
स्वास्थ्य कार्य प्रणाली बेहतर better health system
पाचन शक्ति में वृद्धि increase digestion power
रक्तचाप की क्रिया को सही करता है Corrects blood pressure function
स्त्रियों के रोग को दूर करता है cures women's diseases
(जिन स्त्रियों को समय पर मासिक धर्म menstruation नहीं होते और इन दिनों के दौरान पेट में काफी दर्द होता है उनके लिए सूर्य नमस्कार लाभदायक होता है इसकी अतिरिक्त सूर्य नमस्कार करने से प्रसव delivery के समय अधिक दर्द नहीं होता)
एकाग्रता में वृद्धि increase concentration
मस्तिष्क कोशिकाओं को सक्रिय करता है activates brain cells
रोग प्रतिरोधक क्षमता immunity में वृद्धि
गठिया, वात रोगों में लाभदायक Beneficial in arthritis and gout diseases
शरीर की सहनशक्ति tolerance , stamina में वृद्धि
विटामिन डी हड्डियों को मजबूत Vitamin D strengthens in bones
आंखों की रोशनी बढ़ाने में फायदेमंद होता है.It is beneficial in improving eyesight.
त्वचा रोगों का शमन skin diseases
शरीर में लचीलापन body flexibility
बालों को असमय सफेद होने, झड़ने व रूसी से बचाता है.Prevents hair from premature greying, hair fall and dandruff.
सूर्य नमस्कार करते समय सावधानियां
सूर्य नमस्कार की क्रिया को सूर्य की ओर मुख करके करना चाहिए Surya Namaskar should be done facing the sun.
भोजन करने के बाद सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए Surya Namaskar should not be done after eating food.
आसन करते समय कब श्वास को लेना है कब छोड़ना इस बात का ध्यान रखना चाहिए While doing asana, one should keep in mind when to inhale and when to exhale.
Note जब भी हमारे सीने एवं फेफड़ों में खिंचाव उत्पन्न हो तो हमें श्वास को लेना चाहिए और जब फेफड़े सुकड़े (संकुचित ) तो श्वास को छोड़ना चाहिए।
Whenever there is a strain in our chest and lungs, we should inhale and when the lungs shrink (constricted), we should exhale.
तो इस प्रकार से योग की 1 इकाई का पहला पाठ पूरा होता है आशा करते हैं कि ये पोस्ट आपके लिए काफी मददगार रही होगी तो मिलेंगे अगले पोस्ट में तब तक के लिए
धन्यवाद



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