Yoga chapter 1 part 1 योग एवं ध्यान (yoga and meditation), first unit ,first chapter , part 1

Yoga and meditation


Chapter 1 

Part 1

योग एवं  ध्यान


दोस्तों इस पोस्ट में हम फाउंडेशन कोर्स 'योग एवं ध्यान ' के पहले यूनिट 'योग एवं योगाभ्यास का परिचय' के पहले चैप्टर 'योग' को पढ़ने जा रहे हैं ।आपको बता दें कि इस फाउंडेशन कोर्स में तीन यूनिट है और प्रत्येक यूनिट में लगभग 6 पाठ है इसलिए हमें इसको बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना है व इसकी भी ‌ जमकर तैयारी करनी है बस थोड़ी से प्रेक्टिस से ही हम इसमें अच्छा स्कोर कर सकते हैं

तो आपको बता दें कि आपके इस फाउंडेशन कोर्स का नाम है योग एवं ध्यान इसकी पहली यूनिट है : योग एवं योगाभ्यास का परिचय और इस पहली यूनिट का पहला चैप्टर है : योग आईए शुरू करते हैं पहला चैप्टर कुछ नोट्स के साथ

Yoga chapter 1 part 2

योग

1)योग है.............
 i)एक दर्शन 
ii )एक विज्ञान 
iii ) आत्मा व परमात्मा का जोड़ (योग)अर्थात समाधि
 1) Yoga is…………
 i) A philosophy
ii) A science
iii) Union of soul and God (yog) = Samadhi

2)योग की उत्पत्ति.............
 'युजिरयोगे ' एवं 'युज समाधौ ' में धन्य् प्रत्यय लगाने से 'योग' शब्द की उत्पत्ति होती है।
योग शब्द का प्राचीनतम उल्लेख विश्व के प्राचीनतम ग्रंथ ऋग्वेद में मिलता है।

2) Origin of Yoga…………..
 The word 'Yoga' is formed by adding the suffix 'धन्य' to 'Yujiryoga' and 'Yuj Samadhau'.
The oldest mention of the word Yoga is found in the world's oldest text, Rigveda.

3)योग की परिभाषाएं.............
i)योग समाधि है (महर्षि व्यास ) 
ii )संयम पूर्वक आत्मा एवं परमात्मा का मिलन ही योग है (पाणिनि )
iii )योग चित्तवृत्तिः निरोध : (पतंजलि )
IV ) योग : कर्मसु कौशलम् (योगेश्वर कृष्ण )
V) संसार सागर से पार पाने की युक्ति ही योग है (वशिष्ठ )

4)कुछ अन्य महत्वपूर्ण बिंदु.............


i )योग प्रणाली का अस्तित्व प्राचीनतम काल से ही था । महर्षि पतंजलि ने केवल इसे सूत्रबद्ध किया। दूसरे शब्दों में कहे तो अत्यंत ही प्राचीन समय से योग प्रणाली अस्तित्व में थी इसके रचनाकार हिरण्यगर्भ । परंतु इसे लिपिबद्ध करने वाले एवं इस पर पहला ग्रंथ लिखने वाले पहले व्यक्ति महर्षि पतंजलि थे


ii)आज से 300 ईसा पूर्व सिंधु घाटी सभ्यता की मूर्ति में योग करते हुए व्यक्ति को दिखाया गया है । जो कि इस बात का प्रमाण है कि सिंधु घाटी सभ्यता में भी योग का अस्तित्व था

iil )प्राचीन समय में कुल मिलाकर के 6 आस्तिक दर्शन हुए ।
1 .न्याय दर्शन (महर्षि गौतम )
 2 .वैशेषिक दर्शन ( महर्षि कणाद )
3. सांख्य दर्शन (महर्षि कपिल )
4.  पूर्व मीमांसा दर्शन (महर्षि जैमिनी )
5. उत्तर मिमांसा दर्शन ( महर्षि वदरायण )
6. योग दर्शन (महर्षि पतंजलि )

IV )योग की क्रियाएं: व्यायाम , आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार ,   धारण , ध्यान , समाधि आदि

V)योग दर्शन का उल्लेख संस्कृत वेद,  पुराण, महाभारत , रामायण , जैन एवं बौद्ध आदि ग्रंथ्रों में मिलता है ।

vi)सांख्य दर्शन में कुल 25 तत्व होते हैं । जिनमें एक और तत्व 'ईश्वर' को मिला देने पर वह ' योग  दर्शन '  बन जाता है अर्थात योग दर्शन का आधार संख्या दर्शन ही है।

इसीलिए योग दर्शन को सेवश्वर सांख्य भी कहते हैं
 एवं सांख्य दर्शन को निरीश्वर संख्या भी कहते हैं।

vii) सांख्य दर्शन के 25 तत्व-

पंचमहाभूत :आकाश , धरती , अग्नि , वायु , जल
पांच ज्ञानेद्रियाँ : आंख , कान ,  नाक जीभ, त्वचा
पांच तन्मात्राएं: रूप , शब्द ,  गंध, रस,  स्पर्श
पांच कर्मेंद्रियां :  हाँथ , पैर , मुख , मल इंद्रिय , मूत्र इंद्रिय
अन्य पांच : प्रकृति , बुद्धि , मन , आत्मा , आत्म चेतना 

इस प्रकार यह कुल मिलाकर सांख्य दर्शन के 25 तत्व होते हैं यदि इनमें एक और 26 वाँ तत्व 'ईश्वर' मिला दिया जाए तो यह योग दर्शन हो जाता है।
अर्थात योग दर्शन में कुल 26 तत्व हैं

4)योग सूत्र के रचनाकार महर्षि पतंजलि हैं । जिसमें 195 सूत्र एवं 4 पाद (खंड ) है जो की निम्नवत है
समाधि पाद ,साधना पाद, विभूति पाद,केवल्य पाद

#समाधि पाद में सबीज समाधि एवं निर्बीज समाधि का वर्णन है 
#साधना पाद में योग साधनाओं का वर्णन है 
#विभूति पद में उसकी विभूतियों का वर्णन है
# एवं केवल्य पाद में मोक्ष का वर्णन है


5 )प्रत्याहार :इंद्रियों को उसके विषयों से अलग कर ईष्ट ( उच्च ) प्रयोजनों में लगाना ही प्रत्याहार है ।

6)योग का इतिहास

योग के इतिहास को 5 काल खंडो में विभाजित किया गया है i i )वैदिक काल, ii )पूर्व शास्त्रीय काल ,iii)शास्त्रीय काल ,iv)मध्ययुगीन काल , v) आधुनिक काल
 The history of yoga has been divided into 5 periods: i) Vedic period, ii) Pre-classical period, iii) Classical period, iv) Medieval period, v) Modern period.

i )वैदिक काल Vedic period : वैदिक काल में हमारे वेदों में योग का वर्णन मिलता है। हमारे प्राचीनतम ग्रंथ (scriptures वेद शुरू से ही प्रकृति एवं सृष्टि के रहस्य उद्घाटन (mystery opening )में अपने महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वेद शब्द विद धातु से बना है जिसका अर्थ है ज्ञान ।
कुल चार वेद हैं : ऋग्वेद ,यजुर्वेद ,सामवेद , अथर्ववेद ।

वैदिक काल में तीन तरह के योगों का वर्णन है
 मंत्र योग , प्राण योग ,ध्यान योग

#मंत्र योग में मंत्रों के द्वारा चित्त शुद्धि की जाती है ।
In Mantra Yoga, the mind is purified through mantras.
#प्राण योग ,योग के आठ अंगों में से एक है , जिसमें श्वास की गति पर ध्यान दिया जाता है ।
Prana Yoga is one of the eight limbs of yoga, in which attention is paid to the movement of breathing.
#ध्यान योग में ध्यान लगाया जाता है।
Meditation is done in dhyan yoga.

 ध्यान शब्द ' धी ' धातु से बना है जिसका अर्थ है बुद्धि एवं ज्ञान।

@ योग के आठ अंग है : यम , नियम ,आसन ,प्राणायाम , प्रत्याहार ,धारणा , ध्यान , समाधि।
Yoga has eight parts: Yama, Niyama, Asana, Pranayama, Pratyahara, Dharana, Dhyana, Samadhi.

ii)पूर्व शास्त्रीय काल pre-classical period यह काल भागवत गीता काल भी कहलाता है। भगवत गीता में कुल 18 अध्याय हैं जिनमें से प्रत्येक अध्याय योग कहलाता है एवं भागवत गीता के रचनाकार श्री कृष्ण योगेश्वर कहलाते हैं।
इस काल में भागवत गीता के अनुसार तीन तरह के योग का वर्णन है :कर्म योग ,भक्ति योग, ज्ञान योग
 According to Bhagwat Geeta, three types of yoga are described: Karma Yoga, Bhakti Yoga, Gyan Yoga. ।



iii)शास्त्रीय काल classical period  :इस काल में भगवान बुद्ध ने योग के अष्टांगिक मार्ग का वर्णन किया , एवं उस पर बल दिया। महर्षि पतंजलि ने इसी काल में योग सूत्र की रचना की।
Maharishi Patanjali composed Yoga Sutra during this period.


iv)मध्ययुगीन  काल :medieval timesइस काल में योग की कड़ियां टूटने लगी तब 9 नाथ  एवं 84 सिद्धों ने मिलकर योग को पुनर्जीवित किया। इसके लिए इन्होंने बहुत ही लंबा भ्रमण किया -
,  योग का प्रचार प्रसार किया एवं अनेक ग्रंथ लिखे Promoted Yoga and wrote many books।

#गोरखनाथ , नाथ संप्रदाय के संस्थापक माने जाते हैं Gorakhnath is considered the founder of Nath Sect . एवं भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं। भैरवनाथ इन्हीं के शिष्य थे।

#मध्ययुगीन समय में लिखे गए ग्रंथ :

i )गोरख संहिता ,गोरख  गीत, योग चिंतामणि ( गोरखनाथ )
ii )शिव संहिता ( नित्यनाथ)
iii) हठयोगप्रदीपिका ( स्वात्माराम )
iv) हठ रत्नावली ( श्रीनिवास योगी )



V)आधुनिक काल : Modern period :  इस युग में योग के मूल तत्व पर बल दिया गया In this era, emphasis was laid on the basic elements of Yoga. । आधुनिक योग को एकात्म योग एवं पूर्ण योग भी कहा जाता हैइसकी स्थापना महर्षि अरविंदो अर्थात अरविंद घोष ने की 

इसके अनुसार समस्त प्राणियों में एक ही आत्मा निवास करती है। सबसे बड़ा धर्म मानवता है । भेदभाव ,हिंसा ,
ईर्ष्या (jealousy), लालच, द्वेष( Grudge/hatred) ,काम ,क्रोध ,लोभ ‌ से ऊपर उठकर वास्तविक सत्य को ‌ पहचाना ही परम लक्ष्य( ultimate aim) है।
श्री रामकृष्ण परमहंस एवं विवेकानंद इसी समय के योगी हैं According to this, only one soul resides in all living beings. The greatest religion is humanity. The ultimate goal is to rise above discrimination,-violence, jealousy, greed, hatred, lust, anger and greed and recognize the real truth.

आपका यह योग एवं अध्ययन फाउंडेशन कोर्स न केवल कॉलेज की परीक्षाओं की दृष्टि से अपितु कंपटीशन की दृष्टि से भी बहुत उपयोगी है इसलिए इस पोस्ट में चित्रों को भी जोड़ा गया है ताकि आपका कॉन्सेप्ट और भी क्लियर हो ।
इस पोस्ट में इतना ही अगले पोस्ट में हम इसी पाठ के  second part अध्ययन करेंगे ।
To milenge chapter ke second part mein. 

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